अंबेडकरनगर। समस्त पी0एच0डी0 शोधार्थियों को डाॅ0 बी0आर0 अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय डाॅ0 अंबेडकरनगर, महू, इंदौर, म0प्र0 में ही शोध गाईड/निर्देशक उपलब्ध कराने के संबंध में भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अम्बेडकर प्रतिमा के समक्ष धरना प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन के माध्यम से बताया कि डॉ0 अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय सत्र 2015-16 में विद्यार्थियों ने पी.एच.डी में प्रवेश लिया था। किंतु आज तक विद्यार्थियों को गाईड/निर्देशक उपलब्ध नहीं कराया गया और अब चार साल बाद विश्वविद्यालय ने गाइड/निर्देशक की कमी बताकर विद्यार्थियों को अन्य विश्वविद्यालय में स्थानांतरण का आदेश दिया है, जहां उनका विषय ही बदल दिया गया है जब विद्यार्थी स्थानांतरित विश्वविद्यालय में जा रहे हैं तो उनसे कहा जा रहा है कि जिस विषय से आप पी.एच.डी. डॉ. बी.आर.अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय में कर रहे थे वह विषय हमारे विश्वविद्यालय में नहीं है। अतः आपको विश्वविद्यालय विषय-सूची में ही पी.एच.डी करनी होगी। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों को दोबारा चार साल की पी.एच.डी. दसरे विषय से करनी होगी। जिसके विरोध में विश्वविद्यालय में लगातार पांच साल से पी.एच.डी. कर रहे विद्यार्थी धरने पर बैठे हैं। इस समस्या को लेकर विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति को भी पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया एवं समस्या का समाधान करने हेतु निवेदन किया। परंतु कुलपति के द्वारा भी इस समस्या की उपेक्षा की गयी एवं कोई भी संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं एवं मांगों को लेकर राज्यपाल को भी पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया एवं समस्या का समाधान न किए जाने पर आत्मदाह करने की चेतावनी से भी अवगत कराया। परंतु इसके बाद भी प्रशासन ने कोई भी संतोषजनक कार्यवाही नहीं की। शोधार्थियों की समस्याओं को लेकर निरंतर काफी लंबी अवधि से लापरवाही बरती जा रही है। जिससे स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कुलपति द्वारा योजनाबद्ध तरीके से विश्वविद्यालय में कार्यरत पी.एच.डी. शोधार्थियों (एससी., एसटी, ओबीसी) को शिक्षा से वंचित कर उनका भविष्य बर्बाद कर रहे है। विद्यार्थियों ने मांग किया कि सभी शोधार्थियों का स्थानांतरण निरस्त किया जाए एवं आर.डी.सी. का गठन भी इसी विश्वविद्यालय में किया जाए। सभी शोधार्थियों को उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव के आधार पर गाइड/निर्देशक उपलब्ध कराया जाए। जिन शोधार्थियों की आर.डी.सी. कराई जा चुकी है उनकी थेसिस जमा कराई जाए। किसी भी शोधार्थी को पी.एच.डी. डिग्री पुरा कराये बिना उनका एडमिशन निरस्त ना किया जाए। शोधार्थियों की फेलोशिप का शीघ्र निराकरण कराया जाए। आर.डी.सी. कराने से पूर्व शोधार्थी से अंडरटेकिंग ली जाए। तत्कालीन कुलपति को विश्वविद्यालय से हटाया जाए एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के कुलपति को नियुक्त किया जाए।
ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से संदीप अम्बेडकर, इंजी0 अभिषेक रमन, बुद्धप्रिय पासवान, रवि कुमार, विशाल गौतम, लालजी गौतम, विकास सक्सेना, जय प्रकाश उर्फ गुडडू, आशुतोष गौतम, मनीष कुमार, कमलेश कुमार, दिलीप कुमार, निखिल राव, विजय बहादुर, प्रेमचन्द्र, प्रितम आदि लोग शामिल रहें।
