उत्तर प्रदेश के संभल में हाल ही में एक प्राचीन मंदिर के मिलने की घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। यह मंदिर कथित तौर पर 1978 के दंगों के बाद बंद कर दिया गया था। प्रशासन ने मंदिर से अतिक्रमण हटाकर विधिवत पूजा-अर्चना करवाई और इसका नामकरण "कार्तिक महादेव मंदिर" किया।
कैसे हुआ मंदिर का पता?
14 दिसंबर को पुलिस द्वारा बिजली चोरी के मामलों की जांच के दौरान दीप सराय इलाके के पास एक मंदिर मिला, जिस पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा था। प्रशासन ने 15 दिसंबर को मंदिर से अतिक्रमण हटवाकर पूजा-पाठ का आयोजन किया। डीएम और एसपी ने खुद वहां जाकर पूजा की।
मंदिर की सुरक्षा और नामकरण
प्रशासन ने मंदिर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं और गार्ड तैनात किए हैं। मंदिर के अंदर एक कुंआ भी मिला है जिसे "अमृत कूप" बताया जा रहा है। इसके अलावा, मंदिर की ऐतिहासिकता का पता लगाने के लिए एएसआई को पत्र भेजा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान
इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयान देते हुए कहा कि इतने पुराने मंदिर का अचानक मिलना क्षेत्र की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने 46 साल पहले हुए नरसंहार का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि उस समय दोषियों को सजा क्यों नहीं मिली।
विपक्ष का विरोध
विपक्ष ने इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा। सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि बीजेपी अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मामले उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को हिंदू-मुसलमान के मुद्दों में उलझाकर असली समस्याओं, जैसे महंगाई और बेरोजगारी, से ध्यान हटाना चाहती है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, यह मंदिर कई साल पुराना है। मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान शिव-पार्वती की खंडित मूर्तियां भी मिली हैं। यह मंदिर 1978 के दंगों के बाद बंद कर दिया गया था और इलाके में हिंदू परिवारों के पलायन के कारण लंबे समय तक उपेक्षित रहा।
सरकार का अगला कदम
प्रशासन ने मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्बन डेटिंग और अन्य पुरातात्विक सर्वेक्षण से इसकी प्राचीनता का पता लगाया जाएगा।
संभल की इस घटना ने धार्मिक और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर आस्था का केंद्र बनकर उभरा है।
