शहीद के सपनों को पूरा करने का लिया संकल्प, पुस्तकालय व खेलकूद क्लब खोलने की उठी मांग

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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की 119वीं जयंती पर नौजवान भारत सभा ने माझा कम्हरिया में किया नुक्कड़ सभा का आयोजन

आलापुर (अंबेडकर नगर)। अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की 119वीं जयंती पर नौजवान भारत सभा सिंघलपट्टी की ओर से माझा कम्हरिया गांव में एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान शहीद आज़ाद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके विचारों व संघर्षों को याद करते हुए युवाओं से उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का आह्वान किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए नौभास के मित्रसेन ने कहा कि चन्द्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भांवरा गांव में हुआ था। वे कम उम्र में ही आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। वर्ष 1921 के असहयोग आंदोलन के दौरान वे बनारस के संस्कृत कॉलेज में धरना देते हुए गिरफ्तार हुए थे। जब अदालत में उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम "आज़ाद", पिता का नाम "स्वतंत्रता" और निवास "जेल" बताया। तभी से वे चन्द्रशेखर ‘आज़ाद’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्हें 15 बेंतों की सज़ा दी गई थी, लेकिन उनका संघर्ष यहीं नहीं रुका।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों का सपना शोषणमुक्त, समतामूलक और धर्मनिरपेक्ष भारत का निर्माण था। आज़ाद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनकी शहादत से प्रेरणा लेकर समाज में बदलाव लाना होगा।

नौभास के बिंद्रेश ने कहा कि जब देश महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग बदहाली में जीवन बिता रहे हैं, तब चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारी नेताओं को याद करना और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय और चन्द्रशेखर आज़ाद खेलकूद क्लब खोले जाएं, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।

सभा में अरुण भार्गव, सुशील, रिंकू, रामधनी, शिवासरे, राहुल, विशाल, जयराम, श्याम, छोटई समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और आज़ाद के विचारों को अपनाने का संकल्प लिया।

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