पट्टी के बरहूपुर के युवक का शव 19 दिन बाद भी घर न आ सका

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सुषमा स्वराज से मदद की गुहार के बाद भी नही मिल सकी कोई मदद


प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ में तीन माह पहले घरेलू वाहन चालक के वीजा पर सऊदी अरब गए युवक की मौत के बाद परिजन उसके शव को नहीं देख पा रहे हैं। विदेश मंत्री व सऊदी अरब में भारतीय दूतावास से संपर्क के बाद अरब के सेठ के नाम शव भेजने का ‘अथॉरिटी लेटर भी भेजा लेकिन परिजनों को मायूसी ही हाथ लगी। पट्टी थाना क्षेत्र के बरहूपुर निवासी इंद्रजीत गौतम (39) 13 जून को सऊदी अरब गया था। उसका वीजा तो घरेलू वाहन चालक का था, लेकिन वहां जेद्दा शहर में उसे अली अहमद नामक व्यक्ति के फार्म हाउस पर खेती का काम मिला। 23 अगस्त को पानी पीने के दौरान गिरकर उसकी मौत हो गई। उसका शव वहां अस्पताल के फ्रीजर में रख दिया गया।इंद्रजीत के साथ काम करने वाले लखनऊ निवासी सरवर ने इसकी सूचना दूसरे दिन सुबह 10 बजे फोन पर परिजनों को दी। इसके बाद इंद्रजीत के पड़ोसी सिराज अहमद ने अरबी भाषा बोलने वाले उसके सेठ अली अहमद से फोन पर बात कर पूरी घटना की जानकारी ली। अली अहमद ने बताया कि इंद्रजीत का शव अस्पताल के फ्रीजर में रख दिया गया है। परिजन अपने यहां के मजिस्ट्रेट से अथॉरिटी लेटर भेजें तो वह शव उनके घर भेज देगा। परिजनों ने तहसील से अथॉरिटी लेटर बनवाया और 28 अगस्त को उसे भेज भी दिया। इसके बाद भाजपा कार्यालय पहुंचकर ई-मेल से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से शव मंगाने की गुहार लगाई और सऊदी अरब में भारतीय दूतावास से भी संपर्क किया। अब दो दिन से सऊदी अरब के सेठ का फोन स्विच ऑफ बता रहा है। विदेश मंत्री की ओर से भी कोई जवाब नहीं मिल रहा है। पांच भाइयों में सबसे बड़े इंद्रजीत की बड़ी बेटी अनीता (20) की अभी शादी नहीं हुई है। इंद्रजीत से छोटे उसके भाई विनोद, राकेश, रंजीत और सुरेश कोई नौकरी नहीं करते हैं। खेतीबारी भी कम होने के कारण उसे बेटी की शादी की चिंता हुई तो उसने सऊदी अरब जाने का फैसला किया। गांव के ही निवासी शहजाद ने उसे सऊदी अरब के जेद्दा में घरेलू ड्राइवर का वीजा उपलब्ध कराया। इंद्रजीत के भाई विनोद ने बताया कि शहजाद ने जो वीजा दिया था वह घरेलू वाहन चालक का था जबकि इंद्रजीत के पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। शहजाद ने उसे बताया भी था कि वहां मजदूरी वाला काम मिलेगा। इससे परिजनों को कोई शिकायत नहीं थी लेकिन उसकी मौत के बाद शव मंगाने के लिए हर दर पर गुहार लगाने के बाद भी उन्हें कोई प्रयास कारगर नहीं दिख रहा है। इंद्रजीत का शव न आने से उसकी मां सरोजा देवी, पत्नी पुनरावती, बेटी अनीता, बेटे नितिन व निखिल के साथ ही पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

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