लखनऊ।
जल कृषक विकास सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में दिनांक 3 दिसंबर 2024 को दारुल शफा, ए-ब्लॉक के कॉमन हॉल, लखनऊ में आम सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष भगवान दास मझवार ने की। इस दौरान मछुआ समुदाय के साथ हो रहे उत्पीड़न और उनके हितों की अनदेखी को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन नहीं करने पर रोष
बैठक में भगवान दास मझवार ने बताया कि 9 सितंबर 2024 को मछुआ समुदाय की समस्याओं को लेकर प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस वार्ता में मत्स्य मंत्री भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (मत्स्य) को निर्देश दिए थे कि मछुआरों और मत्स्य मंत्री की सहमति से नीतियों का निर्धारण किया जाए। लेकिन इसके विपरीत, 14 नवंबर 2024 को मत्स्य विभाग ने मनमाने निर्देश जारी कर मछुआ समुदाय की समितियों के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप किया और नई समितियां बना दीं, जो मछुआ समुदाय के हितों के खिलाफ हैं।
गंगा और गोमती की नीलामी पर आपत्ति
सभा में गंगा नदी और गोमती नदी की नीलामी व्यवस्था का कड़ा विरोध किया गया। भगवान दास मझवार ने कहा कि गंगा नदी को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मां का दर्जा प्राप्त है। ऐसी स्थिति में गंगा की नीलामी अनुचित है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि वाराणसी से प्रयागराज तक गंगा नदी की नीलामी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
तालाबों की लगान दर कम करने की मांग
सभा में ग्राम पंचायत के कृषि योग्य भूमि के लगान का उदाहरण देते हुए कहा गया कि तालाबों की लगान दर को भी 100 गुना बढ़ाकर निर्धारित किया जाना चाहिए, ताकि मछुआरों पर आर्थिक बोझ कम हो। इसके अलावा, मछुआ समुदाय के हित में कई अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारी और सदस्य
कार्यक्रम का संचालन रमेश निषाद (सीतापुर) ने किया। बैठक में एडवोकेट संजीव कुमार कश्यप (प्रदेश सचिव), संतोष कश्यप (प्रदेश कोषाध्यक्ष), विजय कश्यप (जिलाध्यक्ष), मनीष निषाद (लखीमपुर), नीलम निषाद (बहराइच), रामफल कश्यप (मेरठ), छोटे लाल निषाद (सुल्तानपुर), राम सहाय निषाद (अमेठी), हरि कृष्ण गौड़, महेन्द्र कश्यप, शमशेर कश्यप, सूबेदार निषाद, सूरज कश्यप, शिवम कश्यप, मुन्ना कश्यप (लखनऊ), बाबूराम कश्यप (लखीमपुर) समेत कई अन्य गणमान्य सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष
बैठक में मछुआ समुदाय की समस्याओं पर गहन चर्चा करते हुए सरकार और प्रशासन से उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
