खेतों और सड़कों पर बह रहा बहुमूल्य पानी
– जहांगीरगंज क्षेत्र के देवरिया बुजुर्ग और इमिलिया बृजभानपुर में पाइपलाइनें फटने से बर्बादी का मंजर
अंबेडकर नगर। विकासखंड जहांगीरगंज के ग्रामीण इलाकों में जल जीवन मिशन की हकीकत अब भ्रष्टाचार और लापरवाही के उदाहरण के रूप में सामने आ रही है। करोड़ों की लागत से बनाई गई पेयजल परियोजनाएं अब सड़कों और खेतों में बहते पानी की शक्ल में बर्बादी का प्रतीक बन चुकी हैं।
ग्रामीणों को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल
गांव देवरिया बुजुर्ग के इमिलिया बृजभानपुर में स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए पाइपलाइनें न केवल खराब क्वालिटी की हैं, बल्कि उन्हें सतह से मुश्किल से एक फुट नीचे दबाया गया है। नतीजतन, जगह-जगह पाइप फट गए हैं और शुद्ध पेयजल खेतों व गलियों में बहता नजर आ रहा है।
खानापूर्ति के लिए लगाए गए टी-प्वाइंट
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कागजों पर काम पूरा दिखाने के लिए गांवों में प्लास्टिक की टोंटियां और टी-प्वाइंट लगा दिए गए हैं। इन टी-प्वाइंट्स को न तो आरसीसी से मजबूती दी गई है और न ही उनके आसपास पानी गिरने के लिए कोई चबूतरा या जल निकासी की व्यवस्था की गई है।
खेतों में बहता पानी बना सिरदर्द
ग्राम पंचायत देवरिया बुजुर्ग में किसान परेशान हैं। खेतों में बहता साफ पानी उनके लिए फसल बर्बादी का खतरा बन गया है। नालियों का कोई उचित प्रबंधन न होने से रास्ते और खेतों में जलजमाव हो रहा है।
अधिकारी की लापरवाही भरी प्रतिक्रिया
इस संबंध में जब जल जीवन मिशन के कर्मचारी हृदेश शर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हल्के अंदाज़ में कहा,
“कल तक ठीक हो जाएगा।”
उनकी यह प्रतिक्रिया न केवल गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता भी दर्शाती है।
ग्रामीणों की मांग – हो जांच और कार्रवाई
ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जल जीवन मिशन के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन न गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न स्थायीत्व का।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब पानी सड़कों और खेतों में बह रहा है, तो गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल कैसे मिलेगा?
