फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे खुद को बचाने में जुटे पूर्व ग्राम पंचायत सचिव

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 केयर टेकर मानदेय घोटाले में परत-दर-परत खुल रही सच्चाई

आलापुर (अंबेडकरनगर)। विकास खंड जहांगीरगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत खरूवांव में केयर टेकर मानदेय घोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। मामले में आरोपों के घेरे में आए पूर्व ग्राम पंचायत सचिव कमलेश कुमार निषाद, जो वर्तमान में रामनगर ब्लॉक में तैनात हैं, अब खुद अपने ही बुने जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।

चार साल से लगातार सेवा दे रही केयर टेकर रीता निषाद को मानदेय न मिलने की शिकायत पर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे फर्जी दस्तावेज़, फर्जी नोटिस और जाली हस्ताक्षर जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

दबंगई और दबाव का खेल

सूत्रों के अनुसार, पूर्व सचिव ने वर्ष 2020 में जिस समूह और केयर टेकर को नियुक्त किया था, उन्हें चुनावी रंजिश के चलते वर्ष 2024 तक कोई मानदेय नहीं मिला। इसके विपरीत, दबाव और दबंगई के चलते आनन-फानन में दूसरे समूह को गलत तरीके से मानदेय भुगतान कर दिया गया, जिसकी शिकायत रीता निषाद ने 4 जुलाई 2025 को मुख्य विकास अधिकारी से की।

जांच में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

रीता निषाद द्वारा की गई शिकायत पर जांच में यह सामने आया कि पूर्व सचिव ने अपनी सफाई में फर्जी नोटिस और जाली हस्ताक्षर वाले कागज़ शामिल किए हैं। जब इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो कोई सूचना प्राप्त की है और न ही किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसी तरह समूह की अध्यक्ष ने भी स्पष्ट किया कि उन्हें आज तक कोई नोटिस नहीं दिया गया और उन्होंने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। फिर भी सचिव ने उन्हें जांच में शामिल कर अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की।

फर्जी नोटिस, फर्जी बयान, फर्जी दस्तावेज़

सूत्रों के मुताबिक, 5 व 6 जुलाई को रामनगर ब्लॉक छोड़कर सचिव जहांगीरगंज ब्लॉक में दिनभर बैठकर फर्जी नोटिस और दस्तावेज़ तैयार करते रहे, जिन्हें बाद में जांच में शामिल किया गया। यह घोर जालसाजी और दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला बनता है।

आदेश की अवहेलना और मनमानी कार्रवाई

यह भी सामने आया है कि मुख्य विकास अधिकारी के आदेश दिनांक 19/10/2023 के बावजूद, फरवरी 2024 में रीता निषाद को बिना अधिकारिक अनुमति के हटा दिया गया। यह स्पष्ट रूप से शासनादेश और अधिकारी के आदेश की अवहेलना है।

ऑनलाइन हाजिरी से हटाना भी दुर्भावना से प्रेरित

4 जुलाई 2025 को रीता निषाद को ऑनलाइन हाजिरी ग्रुप से भी हटा दिया गया, जो संविदा कर्मी राघवेंद्र यादव द्वारा कथित रूप से दबाव में किया गया।

वहीं, पूर्व प्रधान रामू निषाद ने पुष्टि की कि रीता निषाद लगातार दोनों समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहती हैं, और उनके कार्य को लेकर ग्रामवासियों की कोई शिकायत नहीं है।

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